लघु
उद्योग नीति
विवरण
केंद्रीय
सरकार की
नीतियां
राज्य
सरकार की
नीतियां
लघु
उद्योग
क्षेत्र का
उत्पादन सकल
औद्योगिक
मूल्य-संवर्धन
का लगभग 40
प्रतिशत,
भारत के कुल
निर्यात (प्रत्यक्ष
और
अप्रत्यक्ष
निर्यात) का 45
प्रतिशत
सहयोग देता
है तथा कृषि
के बाद मानव
संसाधनों को
रोज़गार देना
वाला दूसरा
सबसे बड़ा
नियोक्ता
है। अत: लघु
उद्योग
क्षेत्र को
भारत की
राष्ट्रीय
योजना में एक
महत्वपूर्ण
भूमिका सौंपी
गई है।
लघु
उद्यमों को
संरक्षण,
समर्थन तथा
संवर्धन देने
के साथ ही
उन्हें
स्वावलम्बी
बनने में
सहायता देने
के क्रम में,
सरकार द्वारा
अनेक
संरक्षात्मक
और संवर्धक
उपाय अपनाये
गए हैं।
उन्नयनकारक
उपायों में
सम्मिलित
हैं :-
-
औद्योगिक
विस्तार
सेवाएं,
- ऋण
सुविधाओं के
लिए
संस्थागत
समर्थन,
-
शेड्स
निर्माण के
लिए विकसित
स्थानों का
प्रावधान,
-
प्रशिक्षण
सुविधाओं का
प्रावधान,
-
किराया-खरीद
आधार पर
मशीनरी की
आपूर्ति,
-
घरेलू
बाज़ार के
साथ-साथ
निर्यात के
लिए सहायता,
-
पिछड़े
क्षेत्रों
आदि में
उद्यम
स्थापित करने
के लिए विशेष
प्रोत्साहन,
-
प्रौद्योगिकीय
उन्नयन के
लिए तकनीकी
परामर्श और
वित्तीय
सहायता।
जहां
अधिकांश
संस्थागत
समर्थन
सेवाएं और
कुछ
प्रोत्साहन
केंद्रीय
सरकार द्वारा
प्रदान किए
जाते हैं, वहीं
राज्य सरकारें
भी अपने-अपने
राज्यों में
औद्योगिक
उत्पादन
बढ़ाने तथा
रोज़गार
सृजन की
दृष्टि से
निवेश
आकर्षित करने
और लघु उद्यमों
को
प्रोत्साहित
करने के लिए
विभिन्न
स्तरों पर
प्रयास करती
हैं।
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